चातुर्मास श्रृंखला के अवसर पर समता भवन बालोद में शासन दीपक श्री अक्षय मुनिजी मसा ने कहा कि सम्यक दृष्टि आत्मा पाप नहीं करता, भगवान ने जिंदगी गहरा जिया, महावीर अनंत गहरे गए। सम्यक दर्शन यानी कि जो है जैसा उसी दृष्टि से देखो। विचार पर जोर नहीं, देखने पर हैं। संसार में आज राजनीतिक सत्ता प्राप्त करनी है तो लोगों को सताओ सत्य चाहिए तो स्वयं को सताओ। आज के दौर में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष हत्या में ही सत्ता मिलती है। माता सीता की परीक्षा राम ने ली, दुनिया ने भी ले ली। सामान्य नारी की परीक्षा नहीं ले सकते हैं। परमात्मा अनंत हैं।*
जैन मुनि ने आगे कहा कि शिकायतों से भरा रदै व्यक्ति प्रार्थना का अधिकारी नहीं क्योंकि प्रार्थना कर रहा है तो चेतना में नहीं कर रहा है। हृदय से प्रार्थना करें। हम शब्दों का रस लेते हैं आत्मा के रस में डूबे नहीं है। सामान्य व्यक्ति की प्रार्थना नहीं याचना छिपी रहती है, प्रार्थना और याचना दोनों में अंतर रात दिन के समान है। याचना पूरी हो सकती है। धीरता पूर्वक समझो मानवता जीवन को। 84 प्रकार की वायु शरीर में होती है जिससे हर आदमी परेशान रहता है। गीता पाठ में कहा है भाग्य के भरोसे नहीं बैठकर पुरुषार्थ करो, फल समय आने पर मिल जाएगा। आनंद के झूले में झूलना है। दुनिया में सारी चीज व्यवस्थित है, हम ही अव्यवस्थित रहते हैं। पूरा ब्रह्मांड सत्यम शिवम सुंदरम है। धन, परिवार, समाज के नशे में मत रहो। आज कई लोग महावीर के धर्म का भी नशा कर रहे हैं कि हमारा धर्म बेस्ट है। कृष्ण, फकीर ने भी सम्यक दर्शन पर जोर दिया। आरोपित सत्य को व्यक्ति देख रहे हैं। आत्मा में जाने नहीं देगा। साधु का जीवन आदर्श होता है। अंधेरे की पृष्ठभूमि में चंद्रमा चमकता है। बाजारू बातों में भरोसा नहीं करना, मजा आ सकता है लेकिन आत्म कल्याण नहीं हो सकता। आवश्यकता से अधिकता बुद्धिमान नहीं होना,धर्म श्रद्धा का खेल है। जैन मुनि की प्रेरणा से तपस्वी रत्ना श्रीमती सोनम श्रीश्रीमाल 29, श्रीमती रितु बाफना ने 28, तथा रितेश पारख ने 4 उपवास तपस्या का संकल्प ग्रहण किया। आज की धर्म सभा में मुंबई, फतेहनगर, विजयनगरम, थान खमरिया, डौंडीलोहारा सहित अंचल के विभिन्न क्षेत्रों से धर्म प्रेमी बन्धु उपस्थित थे।* 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

